केंद्र का बड़ा फैसला: AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर आज से ‘AI जनरेटेड’ लेबल लगाना अनिवार्य हो गया है।
CENTRAL NEWS DESK: डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने आज से AI से बने फोटो, वीडियो और ऑडियो पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों के तहत अब किसी भी AI से तैयार किए गए कंटेंट पर स्पष्ट रूप से “AI जनरेटेड” लेबल लगाना अनिवार्य होगा। सरकार ने यह फैसला भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संशोधित आईटी नियमों के तहत लागू किया है।
हर AI कंटेंट पर लगेगा “AI जनरेटेड” लेबल
नए नियमों के अनुसार अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो AI की मदद से बनाया गया है तो उस पर साफ तौर पर “AI जनरेटेड” लिखा होना चाहिए। सरकार का कहना है कि इससे आम नागरिकों को यह समझने में आसानी होगी कि सामने दिख रहा कंटेंट असली है या कृत्रिम रूप से बनाया गया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- AI कंटेंट पर स्पष्ट और दिखने वाला लेबल हो
- मेटाडाटा (डेटा की तकनीकी जानकारी) में भी यह दर्ज हो कि कंटेंट AI से बना है
- लेबल हटाने या छेड़छाड़ करने पर कार्रवाई हो सके
3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट
नियमों का सबसे कड़ा प्रावधान यह है कि अगर कोई आपत्तिजनक या गैर-कानूनी AI कंटेंट रिपोर्ट किया जाता है तो संबंधित सोशल मीडिया कंपनी को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी, लेकिन डीपफेक और फर्जी वीडियो के तेजी से वायरल होने की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने इसे घटाकर 3 घंटे कर दिया है।
यह नियम खासतौर पर उन मामलों में सख्ती से लागू होगा जहां:
- किसी व्यक्ति की नकली वीडियो या ऑडियो बनाकर बदनाम किया गया हो
- महिलाओं या बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट हो
- फर्जी जानकारी फैलाकर हिंसा या तनाव पैदा किया जा रहा हो
बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर
सरकार ने साफ किया है कि AI का उपयोग यदि बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री बनाने, धोखाधड़ी करने या किसी व्यक्ति की पहचान की नकल (इम्पर्सोनेशन) करने में किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति और प्लेटफॉर्म दोनों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग सबसे अधिक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हो रहा था। ऐसे में यह नियम उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हथियार और धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारी पर रोक
नए दिशा-निर्देशों के तहत AI का उपयोग हथियार बनाने, खरीदने या इस्तेमाल से जुड़ी संवेदनशील जानकारी फैलाने में नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और पहचान चोरी जैसे मामलों में AI का उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ गई है। यदि वे समय पर आपत्तिजनक कंटेंट नहीं हटाते हैं तो उन्हें कानूनी संरक्षण (सेफ हार्बर) नहीं मिलेगा और उन पर कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को केवल मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं बल्कि जिम्मेदार संचार का साधन बनना होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा था कि तकनीक मानवता के हित में होनी चाहिए, न कि भ्रम और अविश्वास फैलाने का माध्यम। सरकार का मानना है कि AI कंटेंट पर लेबलिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा कायम रहेगा।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार इन नियमों से:
डीपफेक वीडियो की पहचान आसान होगी
चुनाव और संवेदनशील मामलों में फर्जी वीडियो के दुष्प्रचार पर रोक लगेगी
सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के प्रसार में कमी आएगी
हालांकि कुछ टेक कंपनियों का कहना है कि 3 घंटे की समय सीमा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन सरकार इसे डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है।
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