सुनेत्रा पवार का महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनने की संभावना

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CENTRAL NEWS DESK: महाराष्ट्र पॉलिटिक्स में अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद एक नया चैप्टर खुलने जा रहा है। डिप्टी सीएम पद के खाली होने के बाद अब उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने की पूरी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) विधायक दल की बैठक के बाद उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। इसके बाद आज शाम करीब 5 बजे राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

अगर यह फैसला अंतिम रूप लेता है, तो सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री होंगी। इसे न सिर्फ राजनीतिक उत्तराधिकार बल्कि संकट की घड़ी में पार्टी को संभालने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

NCP विधायक दल की बैठक में लगेगी मुहर

सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह 11 बजे एनसीपी विधायक दल की अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायकों की मौजूदगी में डिप्टी सीएम पद को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैठक के बाद दोपहर करीब 2 बजे सुनेत्रा पवार के नाम की घोषणा किए जाने की संभावना है। इसके तुरंत बाद राजभवन से संपर्क कर शपथ ग्रहण कार्यक्रम का समय तय किया जाएगा।


प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत से खाली हुआ था पद

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले हुए प्लेन क्रैश हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत हो गई थी। उनके निधन से महाराष्ट्र सरकार में न सिर्फ राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा खालीपन पैदा हो गया। अजित पवार के पास उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त विभाग, आबकारी विभाग, खेल विभाग जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। उनके जाने के बाद इन विभागों के पुनर्वितरण को लेकर लगातार बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है।


फिलहाल वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री फडणवीस के पास रह सकता है

सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने पास रख सकते हैं। बजट सत्र नजदीक होने के कारण सरकार किसी बड़े प्रयोग से बचना चाहती है।

करीब तय माना जा रहा है कि मार्च में होने वाला महाराष्ट्र का बजट मुख्यमंत्री फडणवीस खुद पेश करेंगे। इससे पहले भी वे 9 मार्च 2023 को, उपमुख्यमंत्री रहते हुए, राज्य का बजट पेश कर चुके हैं।

जुलाई 2023 में जब अजित पवार महायुति सरकार में शामिल हुए थे, तब वित्त मंत्रालय फडणवीस ने उन्हें सौंप दिया था। अजित पवार 23 फरवरी को बजट पेश करने वाले थे, लेकिन उससे पहले यह दुखद हादसा हो गया।


दिनभर चला राजनीतिक मंथन

सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाए जाने से पहले शुक्रवार को पूरे दिन राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं।सुबह 11 बजे, एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे मुंबई स्थित मुख्यमंत्री निवास वर्षा बंगले पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ करीब आधे घंटे तक बैठक हुई। चर्चा का केंद्र डिप्टी सीएम पद और विभागों का बंटवारा रहा।

शाम 6 बजे, अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने उनके लंबे समय से राजनीतिक सलाहकार और चुनावी रणनीतिकार नरेश अरोड़ा को बारामती बुलाया। नरेश अरोड़ा की संस्था डिजाइनबॉक्स एनसीपी के लिए रणनीतिक काम करती रही है। रात 8 बजे, नरेश अरोड़ा मुंबई के लिए रवाना हुए। इसी दौरान यह खबर सामने आई कि सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम पद संभालने के लिए तैयार हो गई हैं। हालांकि बजट और प्रशासनिक संतुलन को देखते हुए उन्हें फिलहाल वित्त मंत्रालय नहीं सौंपे जाने की बात कही जा रही है।

रात 8:30 बजे, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया—

“डिप्टी सीएम को लेकर जो भी फैसला होगा, वह एनसीपी लेगी। चाहे पवार परिवार हो या पार्टी, हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। इस विषय पर एनसीपी नेताओं ने मुझसे दो बार चर्चा की है।”


NCP के विलय को लेकर फिर तेज हुई चर्चाएं

अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। इसे लेकर पार्टी के अलग-अलग नेताओं ने बड़े दावे किए हैं।

अजित पवार के करीबी किरण गुजर ने बताया कि वे दोनों गुटों के विलय को लेकर पूरी तरह गंभीर थे। उनके अनुसार, अजित पवार ने एकजुट एनसीपी के भविष्य को लेकर पूरा रोडमैप तैयार कर लिया था और प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने भी कहा कि विलय को लेकर अजित पवार और उनके बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी थीं। योजना यह थी कि पहले स्थानीय निकाय चुनाव गठबंधन में लड़े जाएं और उसके बाद विलय पर अंतिम फैसला लिया जाए।

वहीं, एनसीपी (एसपी) के नेता एकनाथ खड़से ने दावा किया है कि दोनों गुटों का मर्जर लगभग तय हो चुका था और सिर्फ औपचारिक ऐलान बाकी था।

विलय हुआ तो बदलेगा महाराष्ट्र की राजनीतिक समीकरण

सूत्रों के मुताबिक, प्लेन क्रैश से पहले एनसीपी के दोनों गुटों के बीच बातचीत एडवांस्ड स्टेज में पहुंच चुकी थी। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव खत्म होते ही विलय की घोषणा करने की तैयारी थी। अजित पवार की रणनीति यह थी कि पहले जमीनी स्तर पर माहौल को परखा जाए और दोनों दलों के वोट बैंक को मजबूत किया जाए। विलय होने की स्थिति में कैबिनेट और पार्टी संगठन—दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

विलय के बाद एनसीपी के पास 9 लोकसभा सांसद, 51 विधायक होंगे, जिससे सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी दोनों के भीतर शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

जुलाई 2023 में टूटी थी एनसीपी

शरद पवार द्वारा 1999 में स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जुलाई 2023 में उस समय दो हिस्सों में बंट गई थी, जब अजित पवार एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए थे। इसके बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई हुई, जिसमें अजित पवार गुट को मूल एनसीपी नाम और अलार्म घड़ी चुनाव चिह्न मिला। वर्तमान में एनसीपी महायुति सरकार का हिस्सा है, जबकि एनसीपी (एसपी) विपक्षी महाविकास अघाड़ी में शामिल है।


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