“छात्रों पर लाठीचार्ज से गरमाई यूपी की सियासत, ABVP ने योगी सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम”

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Lucknow News Desk: बाराबंकी के रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU) में एबीवीपी (ABVP) कार्यकर्ताओं और लॉ छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज ने यूपी की छात्र राजनीति को गरमा दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने योगी सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दोषी पुलिसकर्मियों और बाहरी हमलावरों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, संगठन ने कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर से उनके विवादित बयान पर सार्वजनिक माफी की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

ABVP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन का मुद्दा था कि SRMU बिना नवीनीकरण और बार काउंसिल की मंजूरी के विधि पाठ्यक्रम चला रहा था। छात्रों का कहना है कि विलंब शुल्क और सामाजिक कल्याण शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली की गई। इसी दौरान, आंदोलनकारियों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया और बाहरी गुंडों ने भी हमला किया।

ABVP की मांगें

  • लाठीचार्ज में शामिल पुलिसकर्मियों और बाहरी तत्वों पर FIR दर्ज हो।
  • निष्कासित किए गए दो छात्रों की वापसी हो।
  • ओपी राजभर अपने बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगें।
  • विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगाए गए अवैध भूमि कब्जे और जुर्माने के आदेश का पालन हो।

अवैध जमीन कब्जे का आरोप

ABVP ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने करीब 6 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था। तहसीलदार कोर्ट ने 25 अगस्त को ₹27.96 लाख का जुर्माना लगाते हुए कब्जा हटाने का आदेश दिया। परिषद का आरोप है कि प्रशासन इस आदेश पर कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहा है।

मंत्री ओपी राजभर पर निशाना

ABVP का गुस्सा तब और भड़क गया जब मंत्री ओपी राजभर ने लाठीचार्ज में घायल छात्रों पर टिप्पणी की। इस पर लखनऊ में ABVP कार्यकर्ताओं ने उनके सरकारी आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, पुतला दहन किया और नारेबाजी की। संगठन का कहना है कि ओपी राजभर को अपने बयान पर माफी नहीं मांगने पर पद से इस्तीफा देना चाहिए।

आंदोलन की चेतावनी

ABVP ने साफ कहा है कि अगर 48 घंटे के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। परिषद के नेताओं का कहना है कि यह केवल छात्रों का सवाल नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई है।

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