गणतंत्र दिवस 2026: क्या कर्तव्य पथ से भारत ने दुनिया को दिया सैन्य आत्मनिर्भरता का संदेश….?

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Central News Desk: गणतंत्र दिवस 2026 सिर्फ एक परेड नहीं थी, बल्कि भारत की डिफेंस इंडिपेंडेंस यानी सैन्य आत्मनिर्भरता की खुली घोषणा थी। तेजस फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी वेपंस प्रणालियों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि भारत अब केवल सैन्य ताकत दिखाने वाला देश नहीं, बल्कि अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी खुद तय करने वाला राष्ट्र बन चुका है।

विदेशी निर्भरता से स्वदेशी शक्ति तक का सफर

दशकों तक भारत की सेना रूस जैसे देशों पर फाइटर जेट, टैंक, सबमरीन और आर्टिलरी के लिए निर्भर रही। इस निर्भरता की कीमत भारत को अपग्रेड में देरी, जियो-पॉलिटिकल दबाव और सैंक्शन्स का खतरा झेलकर चुकानी पड़ी। अब तस्वीर बदल चुकी है। भारत ने इंडिजिनस डेवलपमेंट, डोमेस्टिक प्रोडक्शन और ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिए हैं।

परेड में दिखी आत्मनिर्भर भारत की सैन्य ताकत

इस बार की परेड में जिन प्लेटफॉर्म्स ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उनमें शामिल रहे
1. तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट,
2. आकाश एयर डिफेंस सिस्टम,
3. पिनाका रॉकेट लॉन्चर,
4. एटीएजीएस आर्टिलरी सिस्टम,
5. और ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल।

ये केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत की डिज़ाइन ओनरशिप, ऑपरेशनल कैपेबिलिटी और इंडस्ट्रियल डेप्थ का सबूत था।

तेजस: एयरोस्पेस सॉवरेनिटी का प्रतीक

तेजस फाइटर जेट भारत की एयरोस्पेस सॉवरेनिटी का सबसे बड़ा उदाहरण है।
इसमें लगे एवियोनिक्स, रडार फ्यूज़न और कॉम्पोज़िट एयरफ्रेम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किए गए हैं। यह भारत को फाइटर जेट टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

ब्रह्मोस: डिटरेंस और ऑपरेशनल फ्रीडम का हथियार

रूस के साथ मिलकर विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइल, जिसे अब लखनऊ में बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है, भारत की स्ट्रैटेजिक पोजिशनिंग को पूरी तरह बदल चुकी है। यह मिसाइल भारत को मजबूत डिटरेंस, यानी प्रतिरोधक क्षमता और युद्ध के समय ऑपरेशनल फ्रीडम देती है।

चीन और पाकिस्तान के खिलाफ तैयार स्वदेशी ढाल

अर्जुन टैंक, आकाश, पिनाका और एटीएजीएस जैसे स्वदेशी सिस्टम्स भारत की तैयारी को

  • पाकिस्तान की असिमेट्रिक वॉरफेयर डॉक्ट्रिन
  • और चीन की इंडस्ट्रियल-स्केल मिलिट्री
    दोनों के खिलाफ मजबूत करते हैं।

स्वदेशी क्षमता का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत अब किसी विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रहता।

परंपरा नहीं, डॉक्ट्रिन का प्रदर्शन

यह परेड केवल एक रस्म नहीं थी, बल्कि भारत की मिलिट्री डॉक्ट्रिन का लाइव प्रदर्शन थी। जहां चीन की परेड इंटिमिडेशन यानी डर दिखाने पर केंद्रित होती है, और अमेरिका की परेड स्पेक्टेकल पर, वहीं भारत का प्रदर्शन संयम, रणनीतिक संदेश और इंडस्ट्रियल मैच्योरिटी को दर्शाता है।


इम्पोर्टर से इनोवेटर बनने की कहानी

77 साल की आजादी के बाद भारत अब इम्पोर्टर से इनोवेटर बनने की राह पर है। गणतंत्र दिवस 2026 सिर्फ हथियारों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह ऐलान था कि भारत अब एक क्रेडिबल, सेल्फ-रिलायंट और ग्लोबल डिफेंस पावर के रूप में उभर चुका है।

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