Republic Day 2026: भारत का शक्ति प्रदर्शन, यूरोप के सामने बड़ा संदेश

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CENTRAL NEWS DESK: गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर इस बार सिर्फ परंपरा नहीं, रणनीति भी दिखी। परेड का बदला हुआ सीक्वेंस, टी-90 और अर्जुन टैंकों की एकसाथ मौजूदगी, ब्रह्मोस मिसाइल की गूंज, ड्रोन शक्ति और यूरोपीय सैन्य टुकड़ी की भागीदारी—सब कुछ इस बात का संकेत था कि भारत अब केवल ताकतवर नहीं, बल्कि जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में खुद को पेश कर रहा है।

गणतंत्र का उत्सव और ‘गण’ की तलाश

एक बार फिर कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह को बेहद करीब से कवर करने का मौका मिला। नोएडा से मेट्रो लेकर मंडी हाउस तक का सफर अपने आप में एक अनुभव था। ठंड की गलन के बावजूद परिवारों का उत्साह साफ दिख रहा था। बुज़ुर्ग अपने बच्चों और पोतों को परेड दिखाने ले जा रहे थे, मानो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कल्चर का ट्रांसफर हो रहा हो। बच्चों के गालों पर बना तिरंगा बता रहा था कि असली जश्न उन्हीं का है।हालांकि सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि कई बार यह एहसास हुआ कि गणतंत्र के इस उत्सव में ‘गण’ कहीं ‘तंत्र’ के दबाव में दब सा गया है।


वीआईपी कल्चर खत्म करने की कोशिश या सिर्फ नाम बदलने की कवायद?

इस बार दर्शक दीर्घा के इनक्लोजर का नाम बदला गया। वी-वन की जगह नाम रखा गया नर्मदा। तर्क दिया गया कि इससे वीआईपी कल्चर खत्म होगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बदलाव नाम तक ही सीमित नज़र आया। इसी तरह परेड को लेकर कहा गया कि इस बार बैटल एरे फॉर्मेशन दिखेगा, यानी जैसा युद्ध के मैदान में सेना मूव करती है, वैसा दृश्य कर्तव्य पथ पर होगा। लेकिन सीमित जगह के कारण यह प्रयोग पूरी तरह प्रभावी नहीं दिख सका।


परेड का बदला हुआ सीक्वेंस और टैंकों का नया संदेश

इस बार परेड के सीक्वेंस में बड़ा बदलाव दिखा। जहां हर साल सबसे पहले टैंक आते थे, इस बार वे बाद में दिखे। लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह रही कि टी-90 और अर्जुन टैंक पहली बार एक साथ परेड में नज़र आए। यह स्वदेशी और आयातित सैन्य ताकत के संतुलन का साफ संकेत था।


ब्रह्मोस की एंट्री और ‘बॉट्स’ की चुप्पी

इसके बाद कर्तव्य पथ पर आई ब्रह्मोस मिसाइल। जैसे ही ब्रह्मोस आगे बढ़ी, तालियों की गूंज सुनाई दी। यही वह मिसाइल है जिसने पाकिस्तान को अतीत में उसकी औकात याद दिलाई थी।

लाइव परेड देखते हुए मोबाइल के कमेंट सेक्शन पर नज़र गई। पाकिस्तान के डीजी-आईएसपीआर से जुड़े बॉट्स लगातार भारत विरोधी टिप्पणियां कर रहे थे, लेकिन ब्रह्मोस के आते ही मानो उनका बटन ‘पॉज़’ हो गया।


चीन-पाकिस्तान से निपटने की तैयारी: भैरव बटालियन और हाइपरसॉनिक ताकत

खास आकर्षण का केंद्र बनी भैरव बटालियन, जिसे चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसॉनिक मिसाइल पहली बार परेड में शामिल हुई। इसकी स्पीड 5 मैक से 8 मैक के बीच बताई गई, जो मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम्स के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।


ड्रोन शक्ति: ऑपरेशन सिंदूर से सीखा सबक

परेड में निगरानी से लेकर कामिकाज़े ड्रोन तक की झलक दिखी। स्पष्ट था कि ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से सबक लेते हुए भारतीय सेना खुद को तेजी से बदल रही है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के दिनों में जम्मू सीमा पर पाकिस्तान की ड्रोन एक्टिविटी की खबरें सामने आई हैं।


हिमवीर और साइलेंट योद्धा: असली नायक

अगर किसी ने लोगों और चीफ गेस्ट का दिल जीता, तो वो थे भारत के हिमवीर।
माइनस 40 डिग्री तापमान में देश की रक्षा करने वाले ये योद्धा अपने साथ लेकर आए बैक्ट्रियन कैमल और जांस्कर पोनी। लद्दाख में 14 से 16 हजार फीट की ऊंचाई पर सेना की मदद करने वाले ये जानवर साइलेंट योद्धा हैं, जो दुर्गम इलाकों में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।


आसमान से संदेश: रफाल, सुखोई और ‘सिंदूर फॉर्मेशन’

वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने जैसे ऑपरेशन सिंदूर को जमीन पर उतार दिया। रफाल, सुखोई और मिग-29 ने सिंदूर और विजय फॉर्मेशन के जरिए यह दिखाया कि भारतीय वायुसेना किस तरह दुश्मन को घुटनों पर ला सकती है।

यूरोप के साथ बढ़ती नज़दीकी का संकेत

इस साल समारोह के चीफ गेस्ट थे यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट और यूरोपियन काउंसिल के चेयरमैन। खास बात यह रही कि यूरोप के सैन्य दस्ते भी परेड का हिस्सा बने। यह भारत-यूरोप रिश्तों की गहराई और रणनीतिक साझेदारी का साफ संकेत था।

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