16 मिनट की रेस: जब उन्नाव पुलिस बनी ज़िंदगी की रखवाली — इंस्टाग्राम अलर्ट ने बचाई 19 वर्षीय युवक की जान

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उन्नाव जिले से आई यह घटना सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मानवीय कहानी है — जिसमें वर्दी ने तकनीक और संवेदना का ऐसा संगम दिखाया, जिसने एक युवक को मौत के मुंह से खींचकर ज़िंदगी लौटा दी।

Unnao News desk: सोमवार रात उन्नाव के बिहार थाना क्षेत्र में 19 वर्षीय युवक ने अवसाद में आकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसने फंदा लगाते हुए वीडियो बनाया और इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर दिया। कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने इस वीडियो को पहचान लिया और रात 8:35 बजे यूपी पुलिस मुख्यालय, लखनऊ को ईमेल अलर्ट भेजा। ईमेल में साफ लिखा था — “एक युवक ने आत्महत्या का लाइव प्रयास किया है।”

मुख्यालय से उन्नाव तक दौड़ी उम्मीद

अलर्ट मिलते ही डीजीपी मुख्यालय हरकत में आया। आदेश गया — “लोकेशन ट्रेस करो, तुरंत कार्रवाई करो!” सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर ने कुछ ही सेकंड में लोकेशन ट्रेस की — बिहार थाना क्षेत्र, जनपद उन्नाव। वहीं से सूचना सीधे उन्नाव पुलिस कंट्रोल रूम को भेजी गई।उपनिरीक्षक के नेतृत्व में थाना बिहार की पुलिस टीम तत्काल रवाना हुई।

सिर्फ 16 मिनट में पहुंची पुलिस, और लौटा दी सांसें

घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिस ने दरवाज़ा तोड़ा — अंदर युवक पंखे से लटकने की कोशिश कर रहा था।
कमरे की ऊंचाई कम होने के कारण वह पूरी तरह लटक नहीं पाया, पर उसका गला कसना शुरू हो चुका था। पुलिसकर्मियों ने फौरन फंदा काटा, दुपट्टा हटाया और युवक को ज़िंदा किया। यह पूरी रेस सिर्फ 16 मिनट में पूरी हुई — वो 16 मिनट जो एक जान और मौत के बीच का फासला थे।

प्रेम में टूटा दिल, पर बच गई जान

होश आने के बाद युवक ने बताया कि वह एक लड़की से प्रेम करता था, लेकिन हाल ही में बात बंद हो गई थी।
दुखी होकर उसने यह कदम उठाया। मौके पर ही पुलिस ने उसकी काउंसलिंग की, उसे समझाया कि ज़िंदगी सबसे बड़ी है, कोई रिश्ता उससे बड़ा नहीं।

भावुक युवक ने कहा —

“आप लोगों ने मुझे दूसरी ज़िंदगी दी है… मैं अब कभी ऐसा नहीं करूंगा।”

परिवार के आंसू और पुलिस का मानवीय चेहरा

परिजनों ने भावुक होकर कहा —

“अगर पुलिस कुछ मिनट भी देर करती, तो हमारा बेटा अब ज़िंदा नहीं होता।”
उन्नाव पुलिस ने भी एक भावनात्मक बयान जारी किया —
“हर जीवन की कीमत है। तकनीक और तत्परता के सही उपयोग से अगर एक भी जान बचाई जा सके, तो यही सबसे बड़ा काम है।”

वर्दी का मानवीय रूप — कानून से बढ़कर इंसानियत

यह घटना बताती है कि पुलिस सिर्फ अपराध रोकने की ताकत नहीं, बल्कि जीवन बचाने की उम्मीद भी है।
तकनीक, संवेदनशीलता और रियल-टाइम एक्शन का यह उदाहरण दिखाता है कि जब सिस्टम और इंसानियत साथ चलते हैं, तो चमत्कार संभव हो जाता है।

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