बिहार वोटर लिस्ट: मगध में सबसे ज्यादा नए वोटर जुड़े, सीमांचल में सबसे ज्यादा नाम हटे – NDA के लिए क्या संकेत?
Bihar News Desk: भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक बिहार में अब 7.42 करोड़ पात्र मतदाता हैं। ड्राफ्ट रोल से अंतिम सूची तक करीब 18 लाख नए मतदाता जुड़े हैं।
सीमांचल में सबसे ज्यादा नाम कटे
सीमांचल के चार जिलों – किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया – में औसतन 7.7% वोटर्स के नाम हटाए गए, जो राज्य की औसत दर (5.9%) से काफी अधिक है।
- किशनगंज: 9.69% नाम हटे
- पूर्णिया: 8.41% नाम हटे
- कटिहार: 7.12% नाम हटे
- अररिया: 5.6% नाम हटे
यहां मुस्लिम आबादी लगभग 48% है और 2020 के चुनाव में महागठबंधन को यहां से सबसे ज्यादा फायदा मिला था। AIMIM ने भी यहां 5 सीटें जीती थीं, हालांकि बाद में उसके विधायक राजद में शामिल हो गए।
गोपालगंज में सबसे ज्यादा डिलीशन
गोपालगंज जिले में सबसे ज्यादा 12.13% नाम हटाए गए हैं। यहां 6 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 2020 में एनडीए ने 4 और महागठबंधन ने 2 सीटें जीती थीं।
मगध में सबसे ज्यादा नए वोटर जुड़े
दिलचस्प पहलू यह है कि मगध क्षेत्र, जहां 2020 में एनडीए का प्रदर्शन कमजोर रहा था, वहां इस बार सबसे ज्यादा नए वोटर जुड़े हैं।
- इस क्षेत्र में वोटर वृद्धि दर 2.6% रही, जो पूरे बिहार में सबसे अधिक है।
- पटना जिले में 1.6 लाख नए वोटर जुड़े (3.4% की वृद्धि)।
- नवादा जिले में सबसे कम (1.8%) वृद्धि हुई।
2020 के चुनाव में मगध की 47 सीटों में से महागठबंधन ने 30 सीटें जीती थीं, जिनमें अकेले राजद को 22 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी 9 और जेडीयू सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई थी।
एनडीए की कमजोर कड़ी या नया मौका?
मगध में नए वोटरों की संख्या बढ़ना एनडीए के लिए एक अवसर माना जा सकता है, क्योंकि 2020 में यहां उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त में गया का दौरा किया और करीब 12,000 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इसे चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि क्षेत्रीय मतदाताओं को विकास और सुशासन का संदेश दिया जा सके।
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