“जब अंधकार में दिशाएँ खो जाएँ, तब सबसे बड़ा खतरा खुद अंधेरे से नहीं, बल्कि दिशाहीन नेता से होता है।”
अमेरिका के भविष्य को अंधेरे में धकेल रहे ट्रंप
हर देश से टैरिफ का झगड़ा और नोबेल की मांग
Central News Desk: डोनाल्ड ट्रंप भले ही “Make America Great Again” का दावा करते हों, लेकिन वास्तविकता यह है कि वे पूरी दुनिया से टैरिफ युद्ध छेड़कर अमेरिका को अलग-थलग कर रहे हैं। 7 युद्धों को रोकने का खोखला दावा कर नोबेल शांति पुरस्कार मांगना किसी बच्चे की जिद जैसा है। सच यह है कि ट्रंप अब पूरी तरह दिशाहीन (Directionless) नजर आ रहे हैं।
ट्रंप का बयान कि “रूस से तेल खरीदोगे तो 50% टैरिफ लगेगा” किसी थानेदार की हफ्ता वसूली जैसी मानसिकता को दर्शाता है। सवाल है कि खरीददार पर पाबंदी क्यों, बेचने वाले पर क्यों नहीं?
अमेरिका और यूरोप खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, जबकि भारत पर दोष मढ़ना ट्रंप की मूर्खता को दिखाता है। विडंबना यह है कि यूक्रेन तक भारत से डीज़ल के उच्चस्तरीय आयात को स्वीकार कर रहा है, लेकिन ट्रंप केवल भारत के खिलाफ “झुनझुना” बजा रहे हैं।
ट्रंप स्वयं मान चुके हैं कि “Modi is a very tough negotiator”, फिर भी भारत से पंगा लेने में लगे हैं। मोदी का गुजराती दिमाग अमेरिकी जेब से पैसा निकलवा लेगा, लेकिन अपनी जेब खाली नहीं करेगा। यही खेल ट्रंप को भारी पड़ सकता है।
ट्रंप ने H1B वीज़ा की फीस बढ़ाकर भारत को डराने की कोशिश की, पर यह कदम अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित होगा।
72% H1B वीज़ा भारतीयों के पास हैं।भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर ही अमेरिकी कंपनियों की रीढ़ टिकी है।
अगर ये भारतीय भारत लौटे, तो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री बैठ जाएगी और बाकी देश इन टैलेंट्स को हाथों-हाथ ले लेंगे। ऐसे में MAGA (Make America Great Again) की जगह MAWN (Make America Worst Nation) हकीकत बन सकती है।
UNGA में यूरोप को चेतावनी देते हैं कि मुस्लिम इमिग्रेशन से देश बर्बाद हो जाएंगे, लेकिन वहीं पाकिस्तान के शाहबाज शरीफ और मुल्ला मुनीर जैसे नेताओं के साथ मंच साझा कर सांठगांठ भी कर लेते हैं।
याद रहे, पाकिस्तान ही वह देश है जिसने 9/11 के मास्टरमाइंड को छिपा रखा था। ट्रंप जिस खतरे की बात यूरोप को लेकर करते हैं, वही खतरा अमेरिका पर भी मंडरा रहा है।
ट्रंप ने वादा किया था कि वे Deep State को खत्म करेंगे, लेकिन आज वही उसके मालिक की तरह काम कर रहे हैं। भारत के विपक्ष को खाद-पानी देना इसका सबसे बड़ा सबूत है। अमेरिका को बचाने का दावा करने वाले ट्रंप वास्तव में उसे अंधेरे में धकेल रहे हैं।
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