‘आई लव मोहम्मद’ Vs ‘आई लव महादेव’: बरेली-कानपुर में हाई अलर्ट, फ्लैग मार्च और सुरक्षा कड़े
Central News Desk: आई लव मोहम्मद’ पोस्टरों को लेकर कानपुर से शुरू हुआ विवाद अब कई राज्यों में फैल चुका है। यूपी के बरेली और कानपुर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। बरेली में मौलाना तौकीर रजा ने जुमे की नमाज के बाद धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया, जिसे देखते हुए पुलिस ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। कानपुर में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और हाई अलर्ट घोषित किया गया।
फ्लैग मार्च और सुरक्षा व्यवस्था
बरेली में गुरुवार को डीएम और एसएसपी की अगुआई में पुलिस, पीएसी और अर्धसैनिक बलों ने 5 किलोमीटर लंबा फ्लैग मार्च निकाला। प्रशासन ने शहर को सेक्टर और सब सेक्टरों में बांटकर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया और जगह-जगह बैरिकेड लगाए। साथ ही ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी गई।
मौलाना तौकीर रजा ने भी लोगों से कानून को हाथ में न लेने की अपील की।
कानपुर में भी जुमे की नमाज और रामलीला कार्यक्रमों के मद्देनजर रेड अलर्ट घोषित किया गया। संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
विवाद की शुरुआत और फैलाव
‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टरों को लेकर विवाद की शुरुआत कानपुर से हुई थी। 4 सितंबर को बारावफात के जुलूस के दौरान कुछ लोगों ने तय जगह से अलग एक टेंट और आई लव मोहम्मद का बैनर लगा दिया। इसके विरोध में 10 सितंबर को 25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने FIR वापस लेने की मांग की और 19 सितंबर को जुलूस निकाला।
इसके बाद यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्यों में हिंसक झड़पें और तनातनी की घटनाएं सामने आईं। विवाद धीरे-धीरे ‘आई लव मोहम्मद’ Vs ‘आई लव महादेव’ में बदल गया।
देश के कई हिस्सों में पोस्टरों के जरिए विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। मुंबई और वाराणसी में भी इस तरह की घटनाएं हुईं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सामाजिक बहस
- यूपी के मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विवाद के पीछे साजिश का इशारा करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा।
- जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने कहा कि यह अभियान सांप्रदायिक नहीं है और राजनीतिक हथकंडे और पुलिसिंग ने समाज में तनाव पैदा किया है।
उन्होंने आगे कहा कि शांतिपूर्ण धार्मिक अभिव्यक्ति लोगों का मौलिक अधिकार है और इसे अपराध घोषित करना असंवैधानिक है।
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