चुनावी माहौल में क्यों निशाने पर हैं प्रवासी? भारत के लिए बढ़ी चिंता
TheHeadlineToday News Analysis –
Central News Desk: पश्चिमी देशों, खासकर ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में अप्रवासियों के खिलाफ प्रदर्शनों की नई लहर जोर पकड़ती जा रही है। लंदन की सड़कों से लेकर मेलबर्न तक बड़े पैमाने पर एंटी-इमिग्रेशन मार्च हो रहे हैं। हाल ही में लंदन में 1,10,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया, जो जल्द ही हिंसक हो गया। यही हालात ऑस्ट्रेलिया में भी देखने को मिल रहे हैं।
क्यों भड़क रहा है गुस्सा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत, आवास की कमी और चुनाव-पूर्व राष्ट्रवादी राजनीति ने इस गुस्से को हवा दी है। ब्रिटेन में हालात ऐसे हैं कि प्रवासियों को सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ बताकर प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में छात्रों और प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है।

भारत पर सीधा असर
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया, दोनों जगह भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद है।
- ब्रिटेन में 12 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जिनमें डॉक्टर और आईटी प्रोफेशनल बड़ी भूमिका निभाते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र हर साल शिक्षा अर्थव्यवस्था में 6 अरब डॉलर का योगदान करते हैं।
प्रवासी विरोधी माहौल बढ़ने से न केवल भारतीयों की सुरक्षा और सम्मान पर असर पड़ सकता है, बल्कि भारत के इन देशों से रणनीतिक रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं।
राजनीति और प्रवासी: साझेदारी पर खतरा
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया, दोनों जगह चुनावी मौसम करीब है। ऐसे में राजनीतिक दल राष्ट्रवादी संदेशों के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसका खामियाजा प्रवासी समुदायों को भुगतना पड़ रहा है। भारत सरकार फिलहाल हालात पर कड़ी नजर रखे हुए है।
TheHeadlineToday का विश्लेषण
भारत के लिए यह सिर्फ विदेश नीति का सवाल नहीं है, बल्कि करोड़ों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, पहचान और भविष्य का मुद्दा है। पश्चिमी देशों में अगर यह एंटी-इमिग्रेशन लहर और तेज हुई, तो आने वाले वक्त में भारत को अपने राजनयिक और रणनीतिक संतुलन को और आक्रामक तरीके से साधना पड़ सकता है।
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