नोएडा और मुंबई से दो दर्दनाक घटनाएं: बेबसी और बीमारी ने ली जान, सवाल खड़ा- क्या सुसाइड ही हल है?

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Delhi news Desk: देश में आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं समाज को झकझोर रही हैं। हाल ही में नोएडा और मुंबई से सामने आए दो दर्दनाक मामले इस बात की गवाही देते हैं कि जब जीवन की समस्याएं इंसान को बेबस बना देती हैं, तो लोग आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लेते हैं। लेकिन सवाल है—क्या वाकई ये समस्याओं का समाधान है?

नोएडा: मां ने बेटे संग छलांग लगाकर की आत्महत्या

ग्रेटर नोएडा की एक सोसाइटी में शनिवार देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई।

  • महिला का नाम: साक्षी चावला
  • बेटा: दक्ष चावला (11 वर्ष, मानसिक रूप से विक्षिप्त)
  • घटना: 13वीं मंजिल से छलांग लगाकर मां-बेटे ने जान दी।
  • सुसाइड नोट: पति दर्पण चावला (चार्टर्ड अकाउंटेंट) के नाम लिखा—“हम दोनों आपको और टेंशन नहीं देना चाहते, हमारी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।”

पति घर पर मौजूद थे और चीख सुनकर जब बालकनी पहुंचे, तो पत्नी और बेटा नीचे जमीन पर गिरे पड़े थे। घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। पुलिस का कहना है कि बेटे की मानसिक बीमारी ही इस कदम की मुख्य वजह रही।

मुंबई: 81 साल के बुजुर्ग ने पत्नी की हत्या कर खुद सुसाइड की कोशिश

मुंबई के वसई से दूसरी खौफनाक घटना सामने आई।

  • आरोपी: ग्रैबियल परेरा (81 वर्ष)
  • पत्नी: आर्टिना परेरा (74 वर्ष)
  • घटना: गंभीर बीमारियों से जूझ रही पत्नी का चाकू से गला काटा और खुद की कलाई काटकर आत्महत्या की कोशिश की।

दोनों पति-पत्नी गर्दन, पीठ और घुटने की गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। उस वक्त बेटा घर से बाहर था। जब लौटा तो दरवाजा तोड़कर मां को खून से लथपथ और पिता को गंभीर हालत में पाया।

सवाल उठता है…

इन दोनों घटनाओं में एक ही बात सामने आती है—बीमारी और बेबसी ने इंसान को इतना कमजोर कर दिया कि जीने की उम्मीद खत्म हो गई। लेकिन क्या वाकई बीमारी या मानसिक परेशानी जिंदगी खत्म करने की वजह होनी चाहिए?

समाज में ऐसे अनगिनत लोग हैं जो गंभीर बीमारियों, विकलांगता या मानसिक संघर्षों के बावजूद हिम्मत से जी रहे हैं। अगर परिवार, समाज और सरकार से सही समय पर सहारा और समर्थन मिले तो शायद ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

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