चंद्रग्रहण 2025 : आसमान में लाल चांद का अनोखा नज़ारा, मिथक और विज्ञान की सच्चाई

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Central News Desk: रविवार, 7 सितंबर 2025 की रात आसमान में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस दिन पूर्ण चंद्रग्रहण , जब पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ेगी और वह तांबे जैसी लाल थाली की तरह नजर आया। वैज्ञानिक इसे ब्लड मून भी कहते हैं।

क्यों होता है चंद्रग्रहण?

नासा के अनुसार, चंद्रग्रहण पूर्णिमा पर तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस दौरान सूर्य की रोशनी का नीला हिस्सा वातावरण में बिखर जाता है और लाल रंग चांद तक पहुंचता है, जिससे चंद्रमा लाल दिखाई देता है।

82 मिनट तक रहेगा चंद्रग्रहण

यह पूर्ण चंद्रग्रहण करीब 82 मिनट तक चला। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नज़ारा कवि की कल्पना सा लगा। 2018 में 103 मिनट तक चले ऐतिहासिक चंद्रग्रहण के बाद यह भी एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है।

आर्यभट्ट और ग्रहण का विज्ञान

भारतीय खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने 1500 साल पहले ही समझा दिया था कि ग्रहण प्राकृतिक घटना है। उनकी गणनाएं आज भी खगोल विज्ञान का आधार हैं और अंधविश्वासों को दूर करती हैं।

कैसे देखें चंद्रग्रहण?

  • यह पूरी तरह सुरक्षित है, किसी खास चश्मे या उपकरण की ज़रूरत नहीं।
  • सबसे अच्छा नज़ारा खुले आसमान, छत, पार्क या मैदान से मिलेगा।
  • दूरबीन या टेलीस्कोप से इसे और खूबसूरती से देखा जा सकता है।
  • कैमरे से फोटो लेने के लिए ट्राइपॉड और मैनुअल सेटिंग्स का इस्तेमाल करें।

मिथक बनाम विज्ञान

आज भी कई लोग मानते हैं कि ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए या घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। लेकिन वैज्ञानिक संस्थाएं और खगोल क्लब लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं कि यह केवल प्राकृतिक खगोलीय घटना है।

इसरो और चांद का सफर

भारत का चंद्रयान मिशन चांद की गुत्थियों को सुलझाने में अहम भूमिका निभा चुका है। अब चंद्रयान-4 और जापान के साथ लूपेक्स मिशन की तैयारी हो रही है, जिससे चांद के साउथ पोल का रहस्य खुल सकेगा।

चांद और पृथ्वी का रिश्ता

चंद्रमा सिर्फ खूबसूरत नहीं है, बल्कि पृथ्वी पर जीवन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। समुद्री ज्वार, जीव-जंतुओं की बॉयोलॉजिकल क्लॉक और प्रवासी प्रजातियों की गतिविधियां चांद से जुड़ी होती हैं।

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