लखनऊ में बारावफात की रौनक: रोशनी, जश्न और भाईचारे का संदेश
Lucknow News Desk: बारावफात के मौके पर राजधानी लखनऊ में जश्न का माहौल देखने को मिला। खासकर पुराने लखनऊ की ऐतिहासिक टीले वाली मस्जिद रोशनी से जगमगा उठी। दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने मस्जिद में इबादत की और पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन पर अमन और भाईचारे का संदेश दिया।
मस्जिद को रंग-बिरंगी झालरों और रोशनी से सजाया गया, जिससे नजारा बेहद खूबसूरत हो उठा। रातभर मस्जिद और आस-पास के इलाकों में मेलों का आयोजन हुआ। दुकानों पर भीड़ उमड़ी और लोगों ने शर्बत, मिठाई और खाने का सामान बांटकर एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं।
इस मौके पर माहौल पूरी तरह से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रहा। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी बड़ी संख्या में शामिल हुए। पुराने लखनऊ की गलियां भी रोशनी से दमक उठीं, जिससे पूरे शहर का नजारा और भी खास बन गया।
लोगों का कहना था कि बारावफात न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भाईचारे और मोहब्बत का त्योहार भी है।
क्यों मनाया जाता है रोशनी का त्योहार
बारावफात को पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और यह इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12वीं तारीख को पड़ता है, इसलिए इसे बारावफात कहते हैं, जिसका मतलब “बारह मृत्यु” भी हो सकता है, क्योंकि इसी दिन उनकी मृत्यु भी हुई थी। इस दिन लोग शांति, भाईचारे और प्रेम के संदेश को याद करते हुए जुलूस निकालते हैं और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का बखान करते हैं।
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