तियानजिन से बड़ी खबर: मोदी-शी मुलाकात ने बदला समीकरण, “ड्रैगन और हाथी” अब साझेदार?
Central News Desk: 10 महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने मिले और इस मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा संदेश दिया। एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर हुई यह बैठक न सिर्फ भारत-चीन रिश्तों के लिए अहम रही, बल्कि इससे वैश्विक राजनीति और व्यापार पर भी गहरा असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

रिश्तों में प्रगति और स्थिरता का वादा
दोनों नेताओं ने माना कि पिछले एक साल में रिश्तों में स्थिर प्रगति हुई है। उन्होंने साफ किया कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए और साझेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन विश्व व्यापार को स्थिर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
सीधी उड़ानें और कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल
मोदी ने घोषणा की कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होंगी। कोविड-19 के बाद यह सेवाएं बंद थीं। साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा और पर्यटक वीजा को भी फिर से खोलने पर सहमति बनी। यह आपसी विश्वास बहाली का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
गलवान के बाद भरोसा, अब “दोस्ताना पड़ोसी”
2020 की गलवान झड़प के बाद रिश्तों में तनाव रहा, लेकिन अब दोनों नेताओं ने माना कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी हुई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत को “दोस्ताना पड़ोसी” बताया और कहा कि दोनों देशों को अपने नागरिकों की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

अर्थव्यवस्था और सीमा व्यापार में नया दौर
बैठक में यह भी तय हुआ कि सीमा पार व्यापार फिर से शुरू किया जाएगा। इससे भारत को दुर्लभ खनिज, उर्वरक और टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में मदद मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का ईवी सेक्टर चीनी कंपनियों से लाभान्वित होगा, वहीं चीन को भारतीय बाजारों तक पहुंच से बड़ा आर्थिक फायदा होगा।
अमेरिकी टैरिफ के बीच नई रणनीति
यह कूटनीतिक नजदीकी ऐसे समय आई है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत-चीन की यह साझेदारी अमेरिका की विदेश नीति के लिए चुनौती बन सकती है और दशकों पुरानी रणनीति को बदल सकती है।
तियानजिन में मोदी-शी की मुलाकात ने यह साफ कर दिया कि भारत और चीन अब रिश्तों को प्रतिद्वंद्विता की बजाय साझेदारी की नजर से देखना चाहते हैं। यह मुलाकात एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और कूटनीति के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।
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