कोल्ड ड्रिंक्स पर ऊंचे टैक्स से व्यापारी परेशान, सरकार से राहत की मांग

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Central News Desk: देशभर के छोटे व्यापारी और किराना दुकानदार लंबे समय से कोल्ड ड्रिंक्स पर लगने वाले ऊंचे टैक्स से जूझ रहे हैं। अब कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर मांग की है कि कार्बोनेटेड पेयों को 18% जीएसटी स्लैब में लाया जाए।

मौजूदा टैक्स संरचना

फिलहाल कोल्ड ड्रिंक्स पर कुल 40% टैक्स लगता है। इसमें 28% जीएसटी और 12% क्षतिपूर्ति उपकर (Cess) शामिल है। सरकार ने इसे ‘सिन गुड्स’ की श्रेणी में रखा है, जिस पर अतिरिक्त कर वसूला जाता है।

छोटे कारोबारियों पर असर

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भारतीया ने कहा कि छोटे दुकानदारों की बिक्री का करीब 30% हिस्सा पेय पदार्थों से आता है। लेकिन ऊंची कर दरों के चलते उनकी आय और नकदी प्रवाह पर गंभीर असर पड़ा है। पहले से ही कम मुनाफे पर काम कर रहे ये व्यापारी अब और दबाव झेल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर से तुलना

भारतीय व्यापारियों का तर्क है कि विदेशों में पेयों पर टैक्स 16–18% के बीच होता है। ऐसे में भारत में 40% टैक्स दर अनुचित है। यदि कार्बोनेटेड पेयों को 18% स्लैब में रखा जाए तो यह वैश्विक टैक्स ढांचे के अनुरूप होगा।

राहत से होंगे बड़े फायदे

कैट का मानना है कि टैक्स दर कम करने से:

  • कारोबारियों को टिकाऊ तरीके से व्यापार करने का मौका मिलेगा।
  • असंगठित क्षेत्र (जो अभी 80% तक है) में औपचारिककरण बढ़ेगा।
  • उपभोक्ताओं को सस्ता उत्पाद मिलेगा।
  • रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • सरकार का राजस्व मध्यम अवधि में बढ़ेगा।

सरकार से उम्मीद

कैट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी सुधारों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार छोटे कारोबारियों की इस अहम मांग को स्वीकार करेगी।

यदि ऐसा हुआ तो इसका सकारात्मक असर छोटे दुकानदारों से लेकर उपभोक्ताओं और पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।

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