ट्रंप टैरिफ के बीच जयशंकर का सख्त संदेश – “भारत की अपनी रेड लाइन है”
Central News Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर ने वैश्विक व्यापारिक रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है। भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत इसी संदर्भ में बेहद अहम मानी जा रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक कहा है कि भारत किसी भी दबाव में आकर अमेरिका को रियायत नहीं देगा और देश की “रेड लाइन” यानी सीमा रेखाओं का सम्मान किया जाएगा।
ट्रंप का टैरिफ – क्या है मामला?
27 अगस्त से अमेरिका नए टैरिफ नियम लागू करने जा रहा है। इन नियमों के तहत भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त कर लगाया जाएगा। यह कदम अमेरिकी प्रशासन के संरक्षणवादी (Protectionist) रुख को दर्शाता है। अमेरिका का दावा है कि इस कदम से उसके घरेलू उद्योगों को सुरक्षा मिलेगी।
भारत का रुख
भारत ने अमेरिका को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि—
- वह किसी भी प्रकार की एकतरफा रियायत देने को तैयार नहीं है।
- व्यापारिक समझौते में दोनों पक्षों के हित शामिल होने चाहिए।
- भारत अपने किसानों, छोटे उद्योगों और तकनीकी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।
असर – भारत पर क्या पड़ेगा?
- निर्यात पर दबाव: अमेरिका भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दवाइयां, आईटी सेवाएं, टेक्सटाइल और ऑटो पार्ट्स पर असर पड़ सकता है।
- उपभोक्ताओं पर बो: टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाज़ार में भारतीय सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे मांग घट सकती है।
- वैकल्पिक बाज़ार: भारत अब यूरोप, अफ्रीका और ASEAN देशों की ओर व्यापार बढ़ाने की कोशिश करेगा।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
ट्रंप की “टैरिफ पॉलिसी” चीन, यूरोप और अन्य देशों के साथ भी व्यापारिक विवाद को गहरा रही है। भारत के लिए यह स्थिति एक चुनौती के साथ-साथ अवसर भी है, क्योंकि वह अपने उत्पादों को नए बाज़ारों में बढ़ावा देकर विकल्प तैयार कर सकता ह
जयशंकर का यह बयान भारत की कूटनीतिक सख़्ती और आर्थिक स्वाभिमान दोनों को दिखाता है। आने वाले समय में भारत और अमेरिका के रिश्तों की असली परीक्षा इसी मुद्दे पर होगी। यदि समझौता नहीं हुआ तो व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है, लेकिन भारत का इरादा साफ है – राष्ट्रीय हित सर्वोपरि।
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