भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की नाराज़गी के कई कारण, रूस से तेल खरीद से लेकर ब्रिक्स तक
Central News Desk:अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत को लेकर नाराज़गी कई मुद्दों से जुड़ी हुई है। इनमें रूस से तेल खरीद, ब्रिक्स समूह में भारत की भूमिका, पाकिस्तान के खिलाफ संघर्ष विराम पर ट्रंप के दावों को भारत द्वारा नकारना और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार असंतुलन शामिल हैं।
रूस से तेल खरीद और अमेरिकी हित
ट्रंप की नाराज़गी की एक बड़ी वजह भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदना है। माना जा रहा है कि ट्रंप अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा कम करना चाहते हैं ताकि अमेरिका का तेल निर्यात बढ़ सके। यदि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा तो रूस की आय पर असर पड़ेगा, जिससे यूक्रेन युद्ध पर भी प्रभाव पड़ेगा। ट्रंप का रुख रूस के व्यापारिक साझेदारों पर आर्थिक दबाव बनाने का भी हिस्सा है।
ब्रिक्स को लेकर असहजता
ट्रंप ब्रिक्स को भी अमेरिकी आर्थिक प्रभुत्व के लिए चुनौती मानते हैं। ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और हाल ही में जुड़े अन्य देश) वैश्विक जीडीपी का लगभग 40% योगदान करते हैं। इन देशों के बीच बढ़ता आपसी व्यापार और डॉलर के विकल्पों पर चर्चा ट्रंप को असहज कर रही है, क्योंकि इससे डॉलर की वैश्विक शक्ति घट सकती है। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ब्रिक्स “अमेरिका विरोधी नीतियों” को बढ़ावा देता है। भारत, ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य होने के साथ रूस और चीन के साथ ऊर्जा व व्यापारिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, जो ट्रंप की चिंता बढ़ाता है।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम पर विवाद
ट्रंप बार-बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया, यहां तक कि यह दावा 25 से अधिक बार किया। उनका कहना है कि व्यापार डील और अमेरिकी दबाव के कारण संघर्ष रुका, और उनके हस्तक्षेप के बिना परमाणु युद्ध हो सकता था। हालांकि भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि संघर्ष विराम डीजीएमओ स्तर पर दोनों देशों की सैन्य बातचीत से हुआ और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। ट्रंप के लिए यह असहज स्थिति है कि भारत उनकी दखलअंदाजी को मान्यता नहीं देता।
व्यापार असंतुलन भी बड़ा कारण
भारत-अमेरिका के बीच व्यापार असंतुलन भी ट्रंप की नाराज़गी का एक प्रमुख कारण है। 2024 में अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा 45.7 अरब डॉलर रहा, जो 5.4% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इसका मतलब है कि भारत ने अमेरिका को ज्यादा निर्यात किया और कम आयात किया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इसी आधार पर भारत पर 25% आयात शुल्क लगाया गया, जो व्यापार घाटा और कुल आयात के अनुपात से तय किया गया।
डोनाल्ड ट्रंप के इन कदमों और नाराज़गी के पीछे स्पष्ट संदेश है कि वे अमेरिकी आर्थिक और सामरिक हितों को सर्वोपरि मानते हैं, और इसके लिए भारत जैसे साझेदार देशों पर भी दबाव बनाने से पीछे नहीं हटते।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
