बेरोजगार युवक के खाते में ट्रांसफर हुए अरबों रुपये, ग्रेटर नोएडा में मची हलचल

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@theheadlinetoday4you (12)

Delhi News Desk: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के ग्रेटर नोएडा स्थित ऊंची दनकौर गांव से एक अविश्वसनीय लेकिन तकनीकी गलती पर आधारित मामला सामने आया है। गांव के रहने वाले बेरोजगार युवक दीपक उर्फ दीपू को अचानक अपने मोबाइल पर एक ऐसा SMS आया जिसे पढ़कर न सिर्फ वह बल्कि पूरे इलाके के होश उड़ गए।

दीपक को 1 अगस्त 2025 को उसके कोटक महिंद्रा बैंक खाते में 1 अरब 13 लाख 55 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि ट्रांसफर होने का मैसेज मिला। मोबाइल पर दिखी रकम इतनी बड़ी थी कि इसे पढ़ना भी आम आदमी के लिए संभव नहीं।

SMS में दिखाई गई राशि थी:
₹10,01,35,60,00,00,00,00,00,01,00,23,56,00,00,00,00,299


NAVI UPI App में बग से जुड़ा मामला

जैसे ही यह खबर गांव में फैली, वहां लोगों की भीड़ लग गई। परिवार वाले भी चौंक गए। कुछ ही देर में मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही:

  • दनकौर थाना पुलिस हरकत में आई
  • ग्रेटर नोएडा पुलिस व आयकर विभाग ने पूरे मामले को संज्ञान में लिया
  • बैंक अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट की गई

जांच के बाद सामने आया कि यह पूरा मामला “NAVI UPI App” में तकनीकी खराबी (टेक्निकल ग्लिच) का है। असल में, यह धनराशि कभी ट्रांसफर ही नहीं हुई थी — बल्कि ऐप में बग (Bug) के कारण इतनी बड़ी रकम गलती से बैलेंस में दिखने लगी।


🧾 दनकौर थाना पुलिस ने क्या कहा?

थाना प्रभारी ने बताया,

“NAVI App के एक टैक्निकल बग के कारण केवल ऐप पर ही इतना बैलेंस दिखाई दे रहा था। युवक के खाते में ऐसी कोई वास्तविक ट्रांजैक्शन नहीं हुई है। मामले की पूरी जानकारी संबंधित बैंक और साइबर टीम को दे दी गई है।”


⚠️ लोगों के लिए चेतावनी:

पुलिस और बैंक अधिकारियों ने आम जनता को आगाह किया है कि:

  • ऐसे SMS या नोटिफिकेशन को देखकर तुरंत सोशल मीडिया पर साझा न करें
  • बिना पुष्टि के किसी भी बड़ी राशि को अपने खाते में आया मानना खतरे से खाली नहीं
  • ऐप में दिखाई गई जानकारी की पुष्टि बैंक स्टेटमेंट या कस्टमर केयर से अवश्य करें

क्या था असली कारण?

यह घटना दिखाती है कि डिजिटल लेन-देन और मोबाइल बैंकिंग में टेक्निकल बग या सॉफ्टवेयर ग्लिच कितनी बड़ी गलतफहमी पैदा कर सकते हैं। हालांकि वास्तविक नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन मामले ने सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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