पीलीभीत की खूंखार बाघिन पहुंची कानपुर चिड़ियाघर, 14 दिन के क्वारंटीन में रखी गई
पीलीभीत जिले में दहशत का पर्याय बन चुकी बाघिन को आखिरकार पकड़ लिया गया और शनिवार रात कानपुर चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया गया। यह वही बाघिन है, जिसने बीते दो महीनों में पांच किसानों की जान ले ली थी। अब उसे 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रखा गया है, जहां उसकी हर गतिविधि पर विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
गुस्से में अभी भी भरी है बाघिन
चिड़ियाघर सूत्रों के अनुसार, रविवार सुबह बाघिन को मांस दिया गया, लेकिन उसने उसे छुआ तक नहीं। इससे यह स्पष्ट है कि बाघिन अब भी तनाव और आक्रोश की स्थिति में है। वन्यजीव चिकित्सकों और चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि उसे सामान्य स्थिति में लाने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।
डॉक्टरों की विशेष टीम कर रही निगरानी
पीलीभीत से आई टीम के डॉक्टर नासिर और निदेश कटियार को ही बाघिन के पास जाने की अनुमति दी गई है। चिड़ियाघर प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से आम लोगों और अन्य कर्मचारियों को बाघिन के पास जाने से मना किया है।
कैसे बनी बाघिन दहशत का कारण?
जानकारी के अनुसार, इस बाघिन ने –
14 मई से 9 जून के बीच तीन ग्रामीणों की जान ली
14 और 17 जुलाई को दो और किसानों पर हमला कर उनकी हत्या कर दी
24 जुलाई को बाघिन को वन विभाग की टीम ने जंगल से पकड़ने में सफलता पाई
इन घटनाओं के बाद से पीलीभीत के 15 से अधिक गांवों में भय का माहौल बन गया था। लोग शाम होते ही अपने घरों में कैद हो जाते थे।
क्वारंटीन के बाद क्या होगा?
चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि बाघिन को प्रति दिन 6 से 7 किलो गोश्त दिया जाएगा। क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद उसे एक महीने तक ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। यदि उसका व्यवहार सामान्य होता है, तो उसे चिड़ियाघर में स्थायी रूप से पिंजरे में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए चुनौती
वन विभाग और जू प्रशासन के लिए यह बाघिन मानसिक और व्यवहारिक रूप से असामान्य हो चुकी है। उसे सामान्य बनाने और नए वातावरण में ढालने के लिए विशेषज्ञों को कड़ी मेहनत करनी होगी।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
