मेरठ: साउथ रैपिड रेल स्टेशन की लिफ्ट में फंसे 8 यात्री, 1 साल के मासूम की हालत बिगड़ी

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Central News Desk: साउथ रैपिड रेल स्टेशन (रतापुर) पर लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण आठ यात्री लगभग एक घंटे तक फंस गए। इस घटना में एक 1 वर्ष के मासूम की तबियत बिगड़ने की जानकारी मिली है। यात्रियों ने स्टेशन प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस और स्टेशन स्टाफ ने राहत कार्य कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

स्थानीय यात्रियों के अनुसार रतापुर स्थित साउथ रैपिड रेल स्टेशन की लिफ्ट अचानक रुक गई और अंदर खड़े आठ यात्री — जिनमें महिलाएं और एक साल का बच्चा भी शामिल था — लगभग एक घंटे के समय तक अँधेरे व बंद स्थान में फंस कर रहे। लिफ्ट में फंसने के समय लोग घबराये और मोबाइल/घोषणा प्रणाली से मदद भेजने की कोशिश की।

फंसे यात्रियों की स्थिति

घाय/अस्वस्थ बताए गए यात्री में एक 1 साल का मासूम भी था जिसकी तबियत फंसने के दौरान बिगड़ी बताई जा रही है। पुलिस व स्टेशन मेडिकल टीम ने प्राथमिक सहायता प्रदान की और प्रभावित यात्रियों का हाल-चाल लेकर उन्हें बाहर निकाला गया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार अब अधिकांश यात्रियों की स्थिति स्थिर है, जबकि मासूम की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।

स्टेशन प्रबंधन पर आरोप

फंसे यात्रियों और कुछ प्रतीक्षारत लोगों ने स्टेशन प्रबंधन पर लापरवाही और रख-रखाव की गम्भीर कमी का आरोप लगाया है। यात्रियों का कहना है कि लिफ्ट की नियमित सर्विसिंग और इमरजेंसी प्रोटोकॉल स्पष्ट नहीं थे, इसलिए समय पर मदद पहुँचने में देरी हुई। कई यात्रियों ने कहा कि यदि तकनीकी टीम और रेगुलर निरीक्षण होते तो यह घटना टाली जा सकती थी।

पुलिस और बचाव कार्य

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रमाणिक रूप से मौके पर पहुंची और स्टेशन के तकनीकी कर्मियों की मदद से लिफ्ट खोलकर अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पुलिस ने प्राथमिक पूछताछ की और आसपास मौजूद यात्रियों से घटना का ब्यौरा लिया। मौके पर स्टेशन स्टाफ ने भी फौरन लिफ्ट को निष्क्रिय कर दिया और यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से स्टेशन से बाहर निकाला गया।

संभावित कारण व आगे की जांच

प्रारम्भिक बताया जा रहा है कि लिफ्ट में तकनीकी खराबी आई थी — पावर फाल्ट या इंटर्नल मैकेनिकल फेलियर की संभावना जताई जा रही है। स्टेशन प्रबंधन और संबंधित तकनीकी टीमों से समस्या की विस्तृत जांच कराई जाएगी ताकि यह पता चले कि सर्विसिंग में कमी थी या अचानक तकनीकी कारणों से लिफ्ट रुकी। यात्रियों के आरोपों की भी जांच की जाएगी और यदि प्रबंधन की लापरवाही पायी गयी तो अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की संभावना है।

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