20 साल पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण महंगा

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Central News Desk: देशभर में अब 20 साल से अधिक पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कराना जेब पर भारी पड़ेगा। केंद्र सरकार ने मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने 20 अगस्त को जारी की। इसे सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स, 2025 कहा गया है।

क्या है नया नियम?

पहले 15 से 20 साल पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कम शुल्क में हो जाता था। लेकिन अब 20 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के लिए अलग से “Renewal of Registration” शुल्क तय किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए अहम है।

नई फीस संरचना

20 साल पुराने वाहनों का नवीनीकरण कराने के लिए सरकार ने वाहनों की अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से शुल्क तय किया है।

  • अवैध गाड़ी (Invalid Carriage) – ₹100
  • मोटरसाइकिल – ₹2,000
  • तीन-पहिया/क्वाड्रिसाइकिल – ₹5,000
  • लाइट मोटर व्हीकल (कार, जीप इत्यादि) – ₹10,000
  • इम्पोर्टेड मोटर व्हीकल (टू-व्हीलर/थ्री-व्हीलर) – ₹20,000
  • इम्पोर्टेड मोटर व्हीकल (फोर-व्हीलर या उससे अधिक) – ₹80,000
  • अन्य कोई वाहन (जो ऊपर सूचीबद्ध नहीं) – ₹12,000

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह सभी शुल्क GST (वस्तु एवं सेवा कर) से अलग हैं। यानी नवीनीकरण शुल्क के साथ अतिरिक्त टैक्स भी देना होगा।

कब से लागू होगा?

यह संशोधन भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो जाएगा। यानी नियम 20 अगस्त 2025 से पूरे देश में प्रभावी हो चुके हैं।

क्यों लिया गया यह फैसला?

विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहन ज्यादा धुआं छोड़ते हैं और प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। साथ ही, इनकी तकनीक पुरानी होने के कारण यह सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा पैदा करते हैं। सरकार चाहती है कि लोग पुराने वाहन धीरे-धीरे हटाकर नए, ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल वाहन अपनाएं।

परिवहन मंत्रालय के अनुसार, इससे प्रदूषण पर काबू पाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों और नए तकनीकी वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।

आम जनता पर असर

  • आम नागरिकों को अगर अपने 20 साल पुराने वाहन का इस्तेमाल जारी रखना है तो उन्हें मोटी फीस चुकानी होगी।
  • कार और बाइक मालिकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
  • वाहन उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे पुराने वाहन कबाड़ में जाने लगेंगे और “वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी” को भी बल मिलेगा।

यह नया नियम सीधे तौर पर लोगों को यह संदेश देता है कि 20 साल से अधिक पुराने वाहन सड़कों पर रखना महंगा और मुश्किल होगा। सरकार की मंशा है कि आने वाले समय में भारत की सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों की संख्या कम हो और नई तकनीक वाले वाहन आम हो सकें।

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